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125 राजस्थानी व्यंजन | राजस्थानी रेसिपी | रेसिपी

User Tarla Dalal  •  Updated : Jan 06, 2026
   

राजस्थानी भोजन राजस्थान के समृद्ध इतिहास, जलवायु और सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाता है। इस क्षेत्र की शुष्क जलवायु और पानी की कमी ने यहाँ की पाक शैली को आकार दिया है, जहाँ लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाली, पौष्टिक और स्वाद से भरपूर सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। घी, बेसन, सूखी दालें, मोटे अनाज और सुगंधित मसाले पारंपरिक व्यंजनों की आधारशिला हैं। ताज़ी सब्ज़ियों की ऐतिहासिक कमी के कारण, राजस्थानी रसोई में बेसन, दही और धूप में सुखाई गई सामग्रियों का रचनात्मक उपयोग किया जाता है, जिससे स्वादिष्ट और संतोषजनक भोजन तैयार होता है।

  

क्लासिक राजस्थानी व्यंजन और खाद्य संस्कृति

दाल बाटी चूरमा, गट्टे की सब्ज़ी, केर सांगरी और बाजरे की रोटी जैसे प्रसिद्ध व्यंजन इस भोजन की देसी और भरपूर प्रकृति को दर्शाते हैं। ग्रेवी वाले व्यंजनों में अक्सर दही या छाछ का उपयोग किया जाता है, जो स्वाद में खट्टापन और गहराई लाता है, जबकि भरपूर तड़का सुगंध और शेल्फ लाइफ बढ़ाता है। ये भोजन आमतौर पर भारी और ऊर्जा से भरपूर होते हैं, जो रेगिस्तानी परिस्थितियों में लंबे समय तक शक्ति प्रदान करते हैं।

राजस्थानी मिठाइयाँ भी उतनी ही विशिष्ट हैं, जिनमें घेवर, चूरमा लड्डू, मोहनथाल और मालपुआ जैसी मिठाइयाँ शामिल हैं, जो घी, गुड़, दूध और मेवों से बनाई जाती हैं। ये मिठाइयाँ त्योहारों और उत्सवों से गहराई से जुड़ी होती हैं।

कुल मिलाकर, राजस्थानी भोजन संसाधनशीलता, गहरे स्वाद और परंपरा का उत्सव है। यह सादगी और समृद्धि के बीच संतुलन बनाते हुए एक अनोखा पाक अनुभव प्रदान करता है और अपनी प्राचीन तकनीकों को संजोए रखते हुए आज भी पूरे भारत और दुनिया भर के भोजन प्रेमियों को आकर्षित करता है।

 

 पौष्टिक राजस्थानी क्लासिक्स और थाली व्यंजन | Hearty Rajasthani Classics & Thalis

 

राजस्थान का असली स्वाद उसके पारंपरिक, भरपेट भोजन में बसता है — ऐसी थालियाँ जिनमें दाल, रोटी/बाटी और पारंपरिक व्यंजन मिलकर एक संतुलित और संतोषजनक भोजन बनाते हैं। ये क्लासिक व्यंजन उन लोगों के लिए आदर्श हैं जो घर पर प्रामाणिक मरुस्थलीय स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं।

दाल बाटी चूरमा — मसालेदार दाल, गेहूं की बाटी और मीठे चूरमे का प्रसिद्ध तीन-इन-वन संगम। हर राजस्थानी भोजन प्रेमी के लिए अनिवार्य व्यंजन।


 

 

पंचमेल दाल — पाँच तरह की दालों से बनी यह दाल राजस्थान की पौष्टिक और साधन-संपन्न रसोई को दर्शाती है, जिसे अक्सर रोटी या बाटी के साथ परोसा जाता है।

 

गट्टे का पुलाव — चावल और बेसन के संयोजन को पसंद करने वालों के लिए यह पुलाव बेसन से बने गट्टों के देसी स्वाद को चावल में मिलाता है।

 

 बेसन और राजस्थानी दालों के स्वादिष्ट व्यंजन | Besan and Rajasthani Dal Delights 

 

राजस्थान में चने के आटे (बेसन) और दालों का उपयोग बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ सदियों से ताज़ी सब्ज़ियाँ कम उपलब्ध थीं। यह अनुभाग उन व्यंजनों को प्रस्तुत करता है जहाँ दालें, बेसन और अनाजों को स्वादिष्ट करी और स्नैक्स में बदला जाता है, जो राजस्थान की पारंपरिक शाकाहारी रसोई की रचनात्मकता को दर्शाते हैं।

गट्टे की सब्ज़ी — बेसन से बने स्टीम्ड गट्टों को दही की खट्टी-तीखी ग्रेवी में पकाया जाता है; राजस्थान की सिग्नेचर डिश।

मंगौड़ी की दाल — दाल से बने सूखे पापड़ों (मंगौड़ी) से तैयार यह दाल मरुस्थल की परंपराओं को दर्शाती है जहाँ दालें और सूखी सामग्री आम थीं।

मूँग दाल कचौरी — मूँग दाल से बनी कुरकुरी कचौरी, जो चाय के साथ या हल्के स्नैक के रूप में बिल्कुल उपयुक्त है।

 

 सब्ज़ियों पर आधारित राजस्थानी करी और सब्ज़ियाँ | Vegetable-Based Rajasthani  Curries & Sabzi

 

सूखी भूमि और पानी की कमी होने के बावजूद, राजस्थान ने ऐसी रचनात्मक सब्ज़ियाँ विकसित की हैं जो मौसमी उपज, संरक्षित सामग्री और मसालों के चतुर उपयोग को मिलाकर बनाई जाती हैं। ये सब्ज़ियाँ भोजन में हल्कापन और सब्ज़ियों का अधिक उपयोग जोड़ती हैं — रोज़मर्रा के भोजन या हल्के रात के खाने के लिए बिल्कुल उपयुक्त।

 

केर सांगरी — जंगली बेरी (केर) और सांगरी फली से बनी अनोखी मरुस्थल की सब्ज़ी; हल्की चबाने योग्य, खट्टी और गहराई से पारंपरिक।

 

भरवा लौकी / कद्दू की सब्ज़ी — मसालों से भरी हुई या खट्टी–मसालेदार ग्रेवी में बनी लौकी/कद्दू की सब्ज़ी — स्वाद और सादगी का बेहतरीन मेल।

 

 जल्दी बनने वाले राजस्थानी भोजन और स्ट्रीट-स्टाइल स्नैक्स | Quick Rajasthani Meals & Street-Style Snacks

 

राजस्थान की खाद्य संस्कृति केवल भारी भोजन तक सीमित नहीं है — इसकी स्नैक संस्कृति उतनी ही जीवंत, बुद्धिमान और सुविधा के लिए बनाई गई है। इस अनुभाग में कचौरी, तली हुई नमकीन चीज़ें और क्विक स्नैक्स शामिल हैं, जो दिखाते हैं कि राजस्थान ने कमी को कैसे नवाचार में बदला और ऐसे कुरकुरे, स्वाद से भरपूर स्नैक्स बनाए जो यात्रा में भी टिकें और जल्दी भूख मिटाएँ।

 

प्याज़ की कचौरी — मसालेदार प्याज़ मिश्रण से भरी परतदार, डीप-फ्राइड कचौरी; पूरे राजस्थान की प्रसिद्ध नाश्ता/स्ट्रीट स्नैक।

कलमी वड़ा — दाल से बने कुरकुरे वड़े, जो स्नैक या साइड डिश के रूप में उत्तम हैं — चटनी या दही के साथ बेहतरीन लगते हैं।

मसाला मठरी — मसालेदार, कुरकुरी बिस्किट/पेस्ट्री जैसी नमकीन, जो चाय समय, यात्रा या त्योहारों के जार के लिए आदर्श है।

ये रेसिपीज़ उन शाकाहारियों के लिए बहुत उपयोगी हैं जो जल्दी बनने वाले स्नैक्स, यात्रा के दौरान खाए जाने वाले विकल्प या चाय के साथ क्रिस्पी, प्रामाणिक राजस्थानी स्वाद चाहते हैं — कुरकुरे, संतोषजनक और आसानी से बनने वाले।

 

 पारंपरिक राजस्थानी मिठाइयाँ और शीतकालीन डेज़र्ट्स | Traditional Rajasthani Sweets & Winter Desserts


राजस्थानी व्यंजन मिठाइयों और डेज़र्ट्स में भी उतने ही शानदार हैं — अक्सर समृद्ध, लज़ीज़ और कठोर रेगिस्तानी सर्दियों में ऊर्जा और गर्माहट देने के लिए बनाए जाते हैं।
ये रेसिपियाँ परंपरा और मिठास का शानदार संतुलन पेश करती हैं, और त्योहारों, उत्सवों या सर्दियों के आरामदायक डेज़र्ट्स के लिए बिल्कुल उपयुक्त हैं।

 

मूंग दाल हलवा — मूंग दाल से बना यह समृद्ध, गर्माहट भरा हलवा सर्दियों की एक पसंदीदा मिठाई है, जो अपने सुकून देने वाले स्वाद के लिए मशहूर है।


बादाम का हलवा — शानदार बादाम का हलवा, जो राजस्थान के मेवों, घी और गाढ़ी मिठाइयों के प्रेम को दर्शाता है।


आटे का मालपुआ — एक मीठा, पैनकेक जैसा डेज़र्ट, जो त्योहारों और उत्सवों में बेहद लोकप्रिय है और nostalgia के साथ आराम का एहसास दिलाता है।

 

यदि आपको मिठाइयों का शौक है और आप सामान्य मिठाइयों से हटकर क्षेत्रीय स्वादों को तलाशना चाहते हैं, तो यह अनुभाग आपको भरपूर, प्रामाणिक विकल्प प्रदान करता है — जो सर्दियों, त्योहारों या विशेष अवसरों के लिए बिल्कुल उपयुक्त हैं।

 

 “हल्की राजस्थानी रोटियाँ, ब्रेड और यात्रा-अनुकूल मुख्य व्यंजन | Light Rajasthani  Rotis, Bread & Travel-Friendly Staples


राजस्थान की शुष्क भौगोलिक स्थितियों और लंबे समय तक टिकने वाले भोजन की ऐतिहासिक आवश्यकता के कारण, यहाँ की रसोई ने ऐसी रोटियाँ, ब्रेड और आटे-आधारित व्यंजन विकसित किए जो आसानी से संग्रहीत किए जा सकें, यात्रा में साथ ले जाए जा सकें और दाल, सब्ज़ी या मिठाइयों के साथ बेहतरीन लगते हैं। यह अनुभाग उन बहुउपयोगी व्यंजनों को समर्पित है — जो रोज़मर्रा के भोजन के लिए या जब आपको जल्दी बन जाने वाला पारंपरिक साथ चाहिए, तब बिल्कुल उपयुक्त हैं।

 

हरे मटर की पूरी रेसिपी यह शानदार राजस्थानी हरे मटर की पुरी सुपर स्वादिष्ट है क्योंकि इसमें कई प्रकार के स्वाद और बनावट हैं। इसे नाश्ते के साथ या चाय के समय नाश्ते के रूप में लिया जा सकता है।


खोबा रोटी — हल्की परतों वाली, गाढ़ी बनावट वाली रोटी, जो मसालेदार सब्ज़ियों या गट्टे की करी के साथ बेहतरीन लगती है।.


बाजरा/मिलेट रोटियाँ और मिस्सी-ब्रेड्स — पुराने रेगिस्तानी परंपराओं को दर्शाती ये रोटियाँ मोटे अनाज या मिलेट से बनती हैं और सामान्य गेहूँ की रोटियों की तुलना में अधिक देसी और सेहतमंद विकल्प प्रदान करती हैं।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

 

  1. राजस्थानी भोजन किस लिए प्रसिद्ध है?
    राजस्थानी भोजन अपने गहरे स्वाद, भरपूर घी के उपयोग और अनोखी पकाने की तकनीकों के लिए प्रसिद्ध है। यह भोजन शुष्क जलवायु के अनुसार बनाया गया है और लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है।

     

  2. राजस्थानी भोजन में कौन-सी मुख्य सामग्री उपयोग होती है?
    मुख्य सामग्रियों में घी, बेसन, सूखी दालें, बाजरा, ज्वार, दही और सुगंधित मसाले शामिल होते हैं

     

  3. क्या राजस्थानी भोजन अधिकतर शाकाहारी होता है?
    हाँ, पारंपरिक राजस्थानी भोजन मुख्य रूप से शाकाहारी होता है और इसमें बेसन व दाल से बने कई व्यंजन शामिल होते हैं।

     

  4. राजस्थानी व्यंजनों में दही का उपयोग क्यों किया जाता है?
    दही का उपयोग स्वाद में खट्टापन और मलाईदार बनावट लाने के लिए किया जाता है, खासकर उन व्यंजनों में जहाँ टमाटर कम इस्तेमाल होते हैं।

     

  5. राजस्थानी भोजन में बाजरा और ज्वार का महत्व क्या है?
    बाजरा और ज्वार जैसे मोटे अनाज पोषण से भरपूर होते हैं और गर्म, शुष्क जलवायु में शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करते हैं।

     

  6. राजस्थानी भोजन के साथ कौन-सी रोटियाँ खाई जाती हैं?
    राजस्थानी भोजन के साथ बाजरे की रोटी, मिस्सी रोटी और सादा चपाती आमतौर पर खाई जाती हैं।

     

  7. राजस्थानी मिठाइयाँ किस बात के लिए जानी जाती हैं?
    राजस्थानी मिठाइयाँ घी, गुड़, दूध और मेवों से बनी होती हैं और अपने भरपूर स्वाद व लंबी शेल्फ लाइफ के लिए जानी जाती हैं।

     

  8. क्या राजस्थानी भोजन रोज़मर्रा के खाने के लिए उपयुक्त है?
    हाँ, राजस्थानी भोजन संतुलित मात्रा में सेवन किया जाए तो रोज़मर्रा के भोजन के लिए भी उपयुक्त होता है, खासकर सर्दियों में।

 

निष्कर्ष Conclusion

राजस्थानी भोजन प्रदेश के इतिहास, जलवायु और सांस्कृतिक समृद्धि का सजीव प्रतिबिंब है। इसकी सादगी, टिकाऊ सामग्रियों और गहरे मसालों का उपयोग अद्भुत पाक समझ और संसाधनशीलता को दर्शाता है। भरपूर मुख्य व्यंजनों से लेकर समृद्ध मिठाइयों तक, यह भोजन स्वाद और पोषण दोनों प्रदान करता है। राजस्थानी भोजन आज भी पारंपरिक पकाने की विधियों को संजोए रखते हुए हर पीढ़ी में लोकप्रिय बना हुआ है।

 

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