घी ( Ghee )
घी ( Ghee ) Glossary | Recipes with घी ( Ghee ) | Tarladalal.com
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वर्णन
घी शुद्ध मक्ख़न है, जिसे ब्रेड, पके हुए चावल, सब्ज़ी, मिठाई, आदि के उपर डाला जाता है जिससे एक बेहतरीन खुशबू आती है। वास्तव मे घी का नाम संस्कृत शब्द से उत्तपन्न हुआ जिसका मतलब 'छिड़कना' होता है।

इस विधी का पालन कर घर पर घी बनाया जा सकता हैः
• दूध उबालने के बाद मलाई निकाल लें।
• मलाई ठंडी होने पर, लकड़ी कि चम्मच का प्रयोग कर मिला लें।
• पानी अलग होकर सारा मक्ख़न अलग हो जायेगा।
• मक्ख़न को एक मोटे बर्तन मे डालकर धिमी आँच पर पिघलने दें। हिलाये नही।
• साफ सुनहरा पदार्थ बनने तक पकायें।
• इसमे बुलबुले बनकर एपर सफेद परत बन सकती है, जसे आपको निकाल देना है।
• पदार्थ के साफ सुनहरे होने पर आँच से हठा लें। अगर रंग गहरा हो जाये तो घी ज़्यादा पक गया है।
• बड़ी छन्नी लेकर उसपर सूती के कपड़े कि चार परत बिछायें। इसे सूखे बर्तन पर रख दें।
• गरम गरम ही, ध्यान से सारा घी छन्नी मे डाल दें।
• छाने हुए घी को ध्यान से साफ काँच के बर्तन मे डालें और अच्छी तरह बंद कर लें। शामान्य तापमान पर घी हलका गाढ़ा दिखता है।

चुनने का सुझाव
• घर का बना घी सबसे अच्छा होता है।
• बाज़र से खरीदने पर, अच्छे ब्रेंड का घी चुने क्योंकि कुछ घी मे मिलावट कि जा सकती है।
• किसी प्रकार का शुद्ध घी पुरी तरह से समान होता है और न ही उपर से नरम और नीचे से पुरी तरह से जमा हुआ हो।
• बाज़ार मे जैविक घी भी मिलाते है।

रसोई मे उपयोग
• चूँकि घी आसानी से खराब नही होता, यह मसाले और खाने कि ताज़गी को बनाये रखता है।
• इसकि बहुत सी खाने संबंधित गुण भी होते है, जैसे यह खाने मे खुशबु और स्वाद प्रदान करता है और यह तत्व कि यह खाने के तेल कि आधी मात्रा मे प्रयोग कया जाता है।
• यह खाना बनाने के समय जलता ता धुँआ नही बनाता और विभिन्न प्रकार के मसालो के साथ अच्छी तरह मिल जाता है।
• घी का दाल या सब्ज़ीयों मे तड़का लगाने के लिये प्रयोग किया जाता है और चावल संबंधित व्यंजन जैसे पुलाव और बिरयानी बनाने मे भी।
• गरमा गरम रोटी या पके हुए चावल पर डालने से एक बेहतरीन सुगंध प्रदान करता है।

संग्रह करने के तरीके
• घी को लंबे समय तक फ्रिज के बिना रखा जा सकता है, पर श्यान रहे कि उसे हवा बंद डब्बे मे रखकर ऑक्सीकरण से बचाकर रखें।
• घी निकालने के लिये हमेशा साफ चम्मच का प्रयोग करें।

स्वास्थ्य विषयक
• घी १००% वसा है (लगभग १४ ग्राम प्रति टेबलस्पून) और वह भी सैच्यूरेटड वसा, जो हृदय संबंधित बिमारीयों के लिये माना जाता है। इसलिये ज़रुरत मात्रा मे खाने मे ही समझदारी है।
• परंतु कहा जाता है कि थोड़ी मात्रा मे घी खाना चाहए। हमारे प्राचन आयुर्वेद मे घी को 'रसायना' नाम से संबोधित किया गया है-जिसका मतलब है एैसा खाना जो हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य और जीवन के लिये उपयोगी होता है।
• घी पेट मे प्रस्तुत एसिड कि मात्रा को संतुलित रखने मे मदद करता है और पेट मे श्लेम कि परत के सुधार मे मदद करता है।
• घी मे स्यूटरिक एसिड नामक फॅटी एसिड प्रस्तुत होता है जिसमे वायरसरोधी और कैंसररोधी गुण होते है।




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