वनस्पति ( Vanaspati )
Last Updated : Dec 02,2020


वनस्पति ( Vanaspati ) Glossary | Recipes with वनस्पति ( Vanaspati ) | Tarladalal.com
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वर्णन
भिन्न प्रकार के भारतीय व्यचजन मे घी स्वाद और खुशबु प्रदान करता है। वनस्पति घी का विकल्प है, जिसे अनुमतित खाने के तेल को अर्ध हाईड्रोजीनेट कर बनाया जाता है और इस प्रक्रीया से ठोस पदार्थ मे बनाया जाता है। इसका रंग सफेद और यह छुने पर दरदरा होता है और इसका प्रयोग तलने के लिये किया जाता है। इबेक्ड पदार्थ, मिठाई और नाश्ते में, इसे घी कि जगह प्रयोग किया जाता है।
जब वनस्पति बनाया जाता है, ट्रांस फॅटी एसिड भी बनते है; जिसका शत्यधिक मात्रा मे प्रयोग करने पर, हृदय रोग होने कि आशंका बढ़ा देते है, इसलिये इसे खाने का चुनाव नही करने मे समझदारी है।
डाल्डा वनस्पति का मशहुर ब्रैंड नाम है।

चुनने का सुझाव
• भरोसेमंद ब्रैंड को चुने और अपनी ज़रुरत अनुसार पैकेट का आकार चुने।
• कभी-कभी इस पदार्थ को विटामीन ए और डी से आरक्षित किया जाता है। इसकिये ध्यान से लेबल पढ़कर खरीदें।

रसोई मे उपयोग
• वनस्पति इतना सुगंधित और स्वादिष्ट होता है कि अन्य तेल कि तुलना मे केवल आधा या दो तिहाई मात्रा मे ही डाला जाता है।
• इसका स्मोकिंग पाईन्ट बहुत ज़्यादा होता है और इसलिये इससे पकाने के समय धुआँ नही निकलता और यह जलता नही है।
• विभिन्न प्रकार के मसालोइ के साथ यह आसानी से घुल जाता है।
• आप वनस्पति का प्रयोग खाना भूनने, बेकिंग, तलने या स्प्रैड के रुप मे कर सकते है।
• इसे अक्सर तलने के लिये प्रयोग किया जाता है, जैसे गुलाब जामुन, जलेबी, आदि बनाने में।
• वनस्पति का बेकरी पदार्थ बनाने मे काफी प्रयोग किया जाता है, जैसे पफ, खारी, ब्रैड और बिस्कुट, नानखटाई, केक, मिठाई और आईसक्रीम भी।
• हालाँकि यह काफी किफायती होता है, इसका प्रयोग केवल स्वाद के लिये कम से कम मात्रा मे करना चाहिए, क्योंकि इसमे ट्राइस फॅट कि अधिक मात्रा होती है।

संग्रह करने के तरीके
• वनस्पति घी को हवा बंद डब्बे मे रखा जा सकता है। इसे फ्रिज मे रखना आवश्यक नही होता

स्वास्थ्य विषयक
• वनस्पति घी पेट के एसिड का स्त्रावण करने मे वनस्पति घी प्रयोग किया जाता है जिससे खाना पचाने मे आसानी होती है, वही अन्य प्रकार का वसा जैसे मक्ख़न और तेल पाचन धिमा कर देते है और खाने पर पेट भारी लगता है।
• यह आसानी से खराब नही होता है और वास्तविक रुप से हर्ब और खाने कि प्राकृतिक ताज़गी बनाये रखता है।
• पेट मे अत्यधिक मात्रा मे बने एसिड को संतुलित रखने मे मदद करता है और पेट कि शंदरुपनी परत को संभालने या ठीक करने मे मदद करता है।
• चोट लगने पर जल्द से जल्द उसपर वनस्पति लगाने से दाग और घाँव से बचाता है।
• यह दिमागी विकास के तीनो पहलु को बढ़ाने मे मदद करता है--सीखना, याददाश और सीखे हुए को दोहराना।
• नियंत्रित मात्रा मे इसका प्रयोग लाभदायक माना जाता है, लेकिन साथ ही इसकि अत्यधिक मात्रा वजन बढ़ने का कारण और अन्य बिमारीयों का कारण बन सकती है।




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