लो फॅट छाछ ( Low fat buttermilk )
Last Updated : Nov 30,2020


लो फॅट छाछ ( Low Fat Buttermilk ) Glossary | स्वास्थ्य के लिए लाभ + लो फॅट छाछ रेसिपी ( Low Fat Buttermilk ) | Tarladalal.com
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वर्णन
पानी के बाद ठंडी छाछ, गर्मी से मौसम के लिये एक पौष्टिक पेय है। दही को पानी के साथ मिलाकर, भूने मसाले के साथ मिलाकर इसे बनाया जाता है। इसका खट्टापन दूध मे प्रस्तुत एसिड से आता है। इसे बनाने का दुसरा तरिका लो-फॅट दूध से बने दही का प्रयोग करना है।

चुनने का सुझाव
• लो फॅट छाछ बाज़ार में टेट्रा पैक, गिलास और प्लास्टिक बोतल में मिलता है।
• यह घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है।

रसोई मे उपयोग
• लो फॅट छाछ अपने आप में ही एक ताज़ा पेय है और अक्सर दिन के मुख्य आहार के साथ या खाने के बाद मनक और ज़ीरा मिलाकर परोसा जाता है।
• स्थानीय तौर से छाछ का प्रयोग मसाला रोटी, थेपले बनाने मे किया जाता है जहाँ पानी को छाछ से बदला जाता है, जिससे खाना नरम और मुलायम बनता है।
• डोसा, ईडली या गुजराती हाण्डवे के घोल में, पानी कि जगह लो फॅट छाछ का प्रयोग करें। छाछ में प्रस्तुत खमीर घोल को ज़्यादा अच्छी तरह से फूलने में मदद करता है।
• छाछ में प्रस्तुत एसिड माँस को मेरीनेड करने के लिये उपयुक्त है क्योंकि यह माँस को नरम करने में मदद करता है।
• लो फॅट छाछ से बने पॅनकेक स्वादिष्ट और फूले हुए बनते हैं।

संग्रह करने के तरीके
• फ्रिज छाछ संग्रह करने के लिये उपयुक्त जगह है जिससे छाछ का स्वाद कम से कम २ से ३ दिनों तक ताज़ा रहता है। लबे समय तक बाहर रखने से वह खट्टी हो सकती है।
• जहाँ दूध एक हफ्ते के बाद खराब हो जाता है, वहीं छाछ को हवा बन्द डब्बे, जैसे प्लास्टिक या स्टील में संग्रह करने से लंबे समय तक रखा जा सकता है।

स्वास्थ्य विषयक
• लो फॅट छाछ में दुध कि तुलना में कॅलरी कि मात्रा कम होती है और साथ ही वसा छोड़कर दुध के सभी पौष्टिक गुण होते हैं। इसलिये इसका सुझाव वजन कम करने के लिये और हृदय रोग होने पर दिया जाता है।
• यह पौटॅशियम, विटामीन बी १२ और कॅलशियम से भरपूर होता है जो हमारे शरीर के स्थायी प्रकार्य के लिये ज़रुरी होते हैं।
• दूध कि तुलना में छाछ पचाने में आसान होती है और इसमे वसा मुक्त दुध कि तुलना में ज़यादा मात्रा में दुग्धाम्ल होता है। यह दुग्धाम्ल अनुदारता से पिड़ीत व्यक्ति, खासतौर पर बच्चों के लिये लाभदायक होता है।
• चूँकि यह पचाने में आसान होता है ( दुध में जीवाणु मिलाने कि वजह से), प्रोटीन और कॅलशियम् शरीर में आसानी से अवशोषित हो सकते हैं।
• आहार में वसा कि मात्रा कम करने से वजन कम करने में और उससे संबंधित बीमारियों से बचने में मदद करता है।
• लो फॅट छाछ पीने से, हमारे आहार से वसा कि मात्रा काफी हद तक कम हो जाती है, खासतौर पर दूध से मिलने वाला सैचूरेटड वसा। यह रूधिर पित्तसांद्रव कि मात्रा को संतुलित रखने में मदद करता है जिससे हृदय रोग होने कि आशंका कम हो जाती है।
• लो फॅट छाछ में प्रस्तुत प्रोटीन का प्रकमण नही किया जाता है इसलिये यह उच्च जैविक गुण वाला प्रोटीन कहलाता है।




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